: करीब 75 साल पहले सन 1942-43 में तत्कालीन बंगाल जिसमें आज के पश्चिम बंगाल के अलावा उड़ीसा और मौजूदा बांग्लादेश भी शामिल था,में भयंकर अकाल पड़ा था। दरअसल एक जबरदस्त समुद्री तूफान आया और धान की समूची फसल नष्ट हो गयी। फिर सूखा भी पड़ गया।
आज भी उसकी तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देती है। इस आपदा में 30 लाख लोगों ने भूख से तड़पकर अपनी जान गंवाई थी। ये दूसरे विश्वयुद्ध का समय था। इस अकाल का कारण अनाज के उत्पादन का घटना था, जबकि बंगाल से लगातार अनाज का निर्यात हो रहा था।
एक रिपोर्ट के अनुसार दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे विंस्टन चर्चिल ने जानबूझकर लाखों भारतीयों को भूखे मरने दिया।बर्मा पर जापान के कब्जे के बाद वहां से चावल का आयात रुक गया था और ब्रिटिश शासन ने अपने सैनिकों और युद्ध में लगे अन्य लोगों के लिए चावल की जमाखोरी कर ली थी, जिसकी वजह से 1943 में बंगाल में आए सूखे में तीस लाख से अधिक लोग मारे गए थे।
लोग भूखे मर रहे थे क्योंकि लोगों के पास खाने-पीने की चीजें उपलब्ध नहीं थीं।बाजार में चावल मिल नहीं रहा था, गावों में भूखमरी फैल रही थी।
1943 के बंगाल में कोलकाता की सड़कों पर भूख से हड्डी हड्डी हुई मांएं सड़कों पर दम तोड़ रही थीं।लोग सड़े खाने के लिए लड़ते दिखते थे।
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